History (इतिहास)
घूमना ग्राम का इतिहास अत्यंत प्राचीन, गौरवशाली और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रहा है। यह गांव अपनी सामाजिक एकता, आध्यात्मिक परंपरा और घुणावत गोत्र की ऐतिहासिक विरासत के लिए विशेष पहचान रखता है।
प्राचीन इतिहास के अनुसार मोरा नगरी (गढ़मोरा) में संवत 921 में मोरध्वज द्वितीय का शासन था, जो मौर्य वंश से संबंधित माने जाते हैं। उनके पुत्र रतन कंवर बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। रतन कंवर के पुत्र राजा घणराव हुए, जिनसे घुणावत गोत्र का उदय माना जाता है।
राजा घणराव के वंशजों का निकास मोरा नगरी से हुआ। हमारे पूर्वज पहले बड़ी का गुज्जर तथा पापड़ा के बालाजी (कोल गांव), जो कि बंधा भीतर क्षेत्र में स्थित है, संवत 980 के आसपास वहां आकर बसे। कुछ समय बाद कोड़ गांव से विस्थापित होकर वे वर्तमान घूमना ग्राम की भूमि पर आकर बस गए।
कहा जाता है कि समकालीन यहां गढ़ोली गांव था, जो प्राचीन सभ्यता का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। यहां ठाकुर समाज का समृद्ध और विकसित गांव था। गढ़ोली के समीप यह भूमि संतों की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध थी। संतों का यह क्षेत्र प्राचीन काल से एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र रहा है।
संवत 1100 के लगभग घुणावत गोत्र के रूप में घूमना गांव की उत्पत्ति मानी जाती है। संतों के सानिध्य और आध्यात्मिक वातावरण से प्रेरित होकर हमारे पूर्वज यहां स्थायी रूप से बस गए। लोकमान्यता के अनुसार घूमना गांव के सभी घुणावत मीणा एक ही पिता की संतान माने जाते हैं, जिनका नाम पूरण मीना बताया जाता है। बताया जाता है कि घुणावत गौत्र के पांच गांव घूमना,पिलौदा,पिलोडी,सांकरवाडा व भौटवाडा पांच भाईयों ने बसायें थें।
"प्रथम पूर्वज एवं प्रमुख समाज:-
घूमना ग्राम विभिन्न समाजों की एकता और सामाजिक समरसता का सुंदर उदाहरण है। यहां अनेक समाजों के लोग अपने प्रथम पूर्वजों के साथ आकर बसे, जिनमें प्रमुख हैं:
मीना समाज — पूरण मीना,
ब्राह्मण समाज — टुंडा ब्राह्मण,
कोली समाज — बख्शो कोली,
बैरवा समाज — हटयो बैरवा,
नाई समाज — रामेत नाई,
तेली समाज — चंदो तेली,
बनिया समाज — बांडों बनिया,
गोस्वामी समाज — खाकेन्द्र पूरी,
इन सभी समाजों ने गांव के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
"प्रमुख मंदिर एवं ऐतिहासिक स्थल:-
घूमना ग्राम धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध है। यहां के प्रमुख मंदिर एवं स्थल हैं:
कुल देवी मोरा माता मंदिर
दादूदयाल आश्रम (संत बाबा मंदिर)
गोसाई बाबा मंदिर
माधोसागर बांध
ये स्थान गांव की आस्था, संस्कृति और पहचान के प्रमुख केंद्र हैं।